गर्मी की मार उपाय गायब

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इन दिनों लगभग पूरा देश गर्मी ( Summer Temperature)की मार झेल रहा है। गर्मी से बचने के जतन हर कोई कर रहा है, मगर इस समस्या से निपटने के उपायों की तलाश कोई नहीं कर रहा है। जब ऐसी घटनाओं से हम हर साल दो-चार होते हैं तो भविष्य के लिए कोई सबक क्यों नहीं लेते!

उत्तर भारत के ज्यादातर राज्य इन दिनों लू की चपेट में हैं। जैसी गर्मी पड़ रही है और गर्म हवा की लपटें झुलसा रही हैं, वह कोई नई बात नहीं है। शायद ही कोई साल ऐसा गुजरता हो जब गर्मी के रिकार्ड टूटने की खबरें पढ़ने-देखने को न मिलती हों। मौसम विभाग की भविष्यवाणी और मीडिया की खबरों से जब पता चलता है कि इस बार ये रिकार्ड टूटा, या ये इलाका ज्यादा झुलस रहा है, तब गर्मी का अहसास और भी बढ़ जाता है। यों तो जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों से लेकर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि सभी राज्य प्रकृति की इस मार को झेल रहे हैं। आने वाले दिनों में इससे राहत की कोई उम्मीद नहीं है, यही बात गरमी से कहीं ज्यादा परेशान करने वाली है। ऐसा नहीं है कि रिकार्ड तोड़ गर्मी आज ही पड़ रही है। लेकिन मौसम की मार से निपटने में हम पहले के मुकाबले कहीं न कहीं कमजोर पड़ते जा रहे हैं।

आधुनिक जीवनशैली, खानपान, रहन-सहन के बदलते तौर-तरीकों ने हमें मौसम की मार का सामना करने के मामले में कमजोर कर दिया है। एअर कंडीशनर का ही उदाहरण लें। घर-दफ्तर यहां तक कि सार्वजनिक परिवहन के साधन जैसे बसें, टैक्सी तक एसी से युक्त हैं। कारें तो अब बिना एसी वाली आती ही नहीं हैं। गर्मी से निजात पाने के लिए कस्बों, शहरों और महानगरों में मध्यवर्गीय परिवार तक दो-दो, तीन-तीन एसी लगवा लेते हैं। जो ज्यादा संपन्न हैं वे पूरे घर के लिए छोटे एसी प्लांट तक लगवाते हैं। लेकिन यही एसी अपनी गरम हवा से वातावरण की गर्मी को और बढ़ाता है, यह कोई नहीं सोचता। देश का बड़ा हिस्सा और तबका ऐसा भी है जो बिना कूलर या एसी के गर्मी का सामना करता है। गर्मी की तीव्रता तो उतनी ही है जितनी पचास-सौ साल पहले थी। फर्क इतना ही है कि अब हम सामना करने में कमजोर पड़ते जा रहे हैं।

गर्मी का दूसरा भयावह पहलू भी है जो हमें यह सोचने पर विवश करता है कि क्यों नहीं हम मौसम की मार से लोगों को बचा पाते। पिछले 22 दिनों में गर्मी के प्रकोप से आंध्र प्रदेश में 45 और तेलंगाना में 19 लोगों की मौत हो गई। देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोग गरमी का शिकार बनते हैं, जिनकी खबर तक नहीं बनती। गरीब तबके के पास गर्मी से निपटने के पर्याप्त बुनियादी इंतजाम नहीं होते। करोड़ों परिवार ऐसे हैं जिनके पास पंखे-कूलर जैसी सुविधा भी नहीं है। पीने का साफ पानी नहीं है। लू लगने पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल पाती। ऐसे में गर्मी गरीब को निगल जाती है। यह स्थिति एक लाचार और लापरवाह शासन तंत्र की हकीकत को बयां करती है। गर्मी के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में जंगल धधक उठते हैं। पिछले कई दिनों से उत्तराखंड के जंगल जल रहे हैं। सवाल है जब ऐसी घटनाओं से हम हर साल दो-चार होते हैं तो भविष्य के लिए कोई सबक क्यों नहीं लेते!

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