यें दोस्ती तेरे दम से है: साम्प्रदायिक भाईचारे के असली ब्रांड

शामली के पंकज—सैफ़ी पेश कर रहे हिंदू—मुस्लिम एकता की नजीर

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​देश का अमन—चैन और भाईचारा खत्म करने के लिए तमाम ताकतें लगी हुई है, लेकिन हकीकत यह है कि कई ऐसे लोग भी हैं, जो असल मायनों में इस भाईचारे को जिंदा रखकर समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द की नजीर पेश कर रहे हैं. अगर शामली में ऐसे दो दोस्तों को ढूंढा जाए, तो जुबान पर पंकज—सैफी का नाम बेबस ही उमड़ आता है. ये दो नाम ऐसे हैं, जिनकी दोस्ती के चर्चे यहां हिंदू—मुस्लिम आबादी में गुनगुनाए जाते हैं. इतना ही नही यें दोनों दोस्त अपने—अपने धार्मिक हितों के लिए भी जागरूक है, लेकिन इनकी जागरूकता कभी भी हिंदू—मुस्लिम भाईचारे को ठेस पहुंचने नही देती.

शामली: हम बात कर रहे हैं शामली के विश्व हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष पंकज वालिया और सैफी समाज संघर्ष समिति के अध्यक्ष समाजसेवी सैफी हिंदुस्तानी की. सै​फी हिंदुस्तानी का पूरा नाम आबिद सैफी है. शामली जनपद के चाहे मोहर्रम, ईद हो या फिर नवरात्र, दीपावली, जहां पर भी धार्मिक सौहार्द की बात सामने आती है, तो इन दोनों शख्शित का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है. समाजसेवियों के रूप में अपने—अपने धार्मिक संगठनों का भी प्रतिनिधित्व करने वाले यें दोनों दोस्त हमेशा लोगों के सुख—दुख में आगे खड़े नजर आते हैं। यें दोनों ही शख्श लंबे अरसे से जिले में हिंदू—मुस्लिम भाईचारे की नजीर भी बने हुए हैं।

जब कांवडियों की सेवा में दिखा साम्प्रदायिक भाईचारा
इस बार कांवड यात्रा के दौरान विश्व हिंदू महासंघ द्वारा ब्रेक प्वाइंट रेस्टोरेंट पर प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक पद्धति का चिकित्सा शिविर लगाया गया था. इस शिविर ने कांवडियों की सेवा के लिए देश—विदेश भी भी ख्याति प्राप्त की. शिविर में पंकज वालिया और सैफी हिंदुस्तानी ने अपने—अपने संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कार्यकर्ताओं की सेवा की. दोनों दोस्तों की सेवा भक्ति के चर्चे सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हुए. यहां तक की शामली पुलिस ने भी अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर इनकी तस्वीरें अपलोड की.

2013 में लिया था एकता का संकल्प
वर्ष 2013 में जब शामली और मुजफ्फरनगर दंगे की आग में झुलस रहे थे. लोगों का भाईचारा और सब्र टूट चुका था, तब शामली में इन दोनों दोस्तों ने आगे बढ़कर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की थी. इनके द्वारा दंगा पीडितों की सहायता भी की गई थी, वहीं लोगों में भाईचारा कायम रखने के लिए एक दूसरे के साथ खड़े होकर सौहार्द का संदेश भी दिया था. 2013 में साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करने के साथ ही इन दोनों ने हमेशा हिंदू मुस्लिम एकता और भाईचारे को बढ़ाने का संकल्प लिया, जिसपर यें आज भी खरे उतरते नजर आ रहे हैं।

एनडीटीवी के रविश कुमार ने भी प्रशंसा
इस बार कांवड यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरे खूब वायरल हुई, जिसमें सैफी हिंदुस्तानी मुस्लिम धर्म की टोपी लगाकर शिव भक्तों के पैरों पर मरहम लगाते हुए नजर आए. इनके साथ पंकज वालिया भी धार्मिक पटका पहने कांवडियों की सेवा कर रहे थे. इन दोनों के फोटो कांग्रेस के राहुल गांधी, एनडीटीवी के रवीश कुमार, उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ पुलिस ऑफिसर नवनीत सिकेरा, मशहूर शायर इमरान प्रतापगढी आदि जैसे बड़े बड़े सेलिब्रिटी ने अपनी टाइमलाइन पर खुद पोस्ट भी किए.

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