शामली में दो दिन बंद रहेंगे 12वीं तक के सभी प्राईवेट स्कूल

नई स्कूल वाहन नीति पर अटका फैसला, तो उठाया यह कदम

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नई स्कूल वाहन नीति पर न तो प्राईवेट स्कूल चलने के लिए तैयार हैं, और न ही प्रशासन इसमें कोई ढ़िलाई बरतने के मू्ंड में नजर आ रहा है। मंगलवार को स्कूल संचालकों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में भी इसपर कोई फैसला नही हो पाया है। इसके चलते अभिभावकों और बच्चों की असुविधाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने 12वीं तक के सभी प्राईवेट स्कूलों में दो दिन के अवकाश की घोषणा कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
सरकार द्वारा मोटर वाहन नियमावली 2019 के 26वें संशोधन के द्वारा स्कूल वाहनों के नियमों में भारी परिवर्तन कर दिया गया है, जो कि बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत पूर्णरूप से न्याय संगत है, स्वागत योग्य है. अभिभावकों द्वारा भी पिछले काफी समय से इसकी डिमांड की जा रही थी, लेकिन स्कूलों के लिए नई विद्यालय वाहन नीति लागू करना गले की फांस बन गई है. ​​जिले में नई स्कूल वाहन नीति लागू करने की समय सीमा 28 अगस्त निर्धारित की गई थी। इससे पहले ही स्कूलों द्वारा संदेश भेजकर अभिभावकों को यह बताया गया कि यदि स्कूल इस वाहन नीति को लागू करते हैं, तो बच्चों की ट्रांसपोर्ट फीस 200 गुना तक बढ़ सकती है. अभिभावकों की जेब पर बढ़ते दबाव को देखते हुए ऐसे हालातों में स्कूलों द्वारा ट्रांसपोर्ट सुविधा जारी रखना असंभव है।

 

यह है नई विद्यालय वाहन नीति
. स्कूली वाहनों को फिट रखने का संपूर्ण उत्तर दायित्व विद्यालय प्रबंधन के ऊपर
. प्रत्येक बस में सीसीटीवी कैमरा एवं मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम लगवाना अनिवार्य
. बसों के चालकों एवं अटेंडेंट को निर्धारित वर्दी पहनना अनिवार्य
. बसों में निर्धारित संख्या में भी बच्चों की मौजूदगी.

 

नियमों लागू करने में संकोच क्यों?
नई विद्यालय वाहन नीति सरकार द्वारा जो नियम लागू किए गए हैं, वह जरूरी हैं। यह भी सत्य है कि इन नियमों को वाहनों में लागू करने में परहेज करना सीधे तौर पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करना है, जैसा कि स्कूली वाहनों के साथ हादसे होने के बाद देखने को मिलता है। सरकार इस मुद्दे पर इसलिए भी गंभीर है कि स्कूली बच्चों के साथ हादसों के बाद सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, जबकि गलती स्कूली वाहन सेवा प्रदाताओं की अधिक होती है।

 

बैठक में नही हुआ कोई फैसला
जनपद में नई स्कूल वाहन नीति लागू करने की समयावधि 28 अगस्त होने के चलते मंगलवार को एक दिन पूर्व स्कूल संचालकों और जिला प्रशासन के बीच इस मसले पर बैठक हुई, लेकिन बैठक में कोई फैसला नही हो पाया। इसके चलते जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने शिक्षा वि​भाग के अधिकारियों को स्कूलों में दो दिनों का अवकाश घोषित करने के निर्देश दिए। जिला विद्यालय निरीक्षक सरदार सिंह ने बताया कि डीएम के निर्देशानुसार जनपद के 12वीं कक्षा तक के सभी प्राईवेट स्कूलों में दो दिनों के अवकाश की घोषणा की गई है, ताकि अभिभावकों और बच्चों को असुविधा से बचाया जा सके।

 

हिंद टुडे की प्रतिक्रिया
स्कूलों द्वारा ट्रांसपोर्ट सुविधा के नाम पर अभिभावकों से प्रतिमाह फीस वसूली जाती है, लेकिन बच्चों को वाहनों में ठूस—ठूस कर भर दिया जाता है. एक—एक वाहन में निर्धारित से दोगुने बच्चे ले जाए जाते हैं, हादसों की सूरत में इसका खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ता है। यदि गंभीरता से सोचा जाए, तो सरकार का यह फैसला किसी भी सूरत में गलत नही ठहराया जा सकता। अभिभावकों को भी इस पर विचार करने की जरूरत है।

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