आखिर सर्विसलांस सेल क्यों तोड़ रहा उम्मीद ? बड़ा खुलासा

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मोबाइल चोरी या खो जाने पर पीड़ित को मदद की उम्मीद होती है कि पुलिस उसका नंबर सर्विलांस पर लगा देगी. यदि नंबर चालू होगा तो फोन बरामद कर लिया जाएगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. पुलिस सिर्फ अप्लीकेशन पर थाना की एक मोहर मारकर इतिश्री कर लेती है। इसे खेल कहे या उत्पीड़न यह पूरे प्रदेश में होता है. समस्त उत्तर प्रदेश के साथ साथ हमारे शामली जनपद में यह बदस्तूर जारी है.

शामली: जमाना बदलने के साथ ही आज सबकुछ हाईटैक हो चुका है. मोबाइल फोन आज सभी की जरूरत है, क्योंकि उसके बिना आप भागती—दौड़ती दुनिया से पिछड़ सकते हैं. रोजगार भी मोबाइल की घंटी से ही उपलब्ध होते हैं. मशीनी जंग के सामने लोग खुद का पेट भरने के लिए कैसे—कैसे करके मोबाइल फोन खरीदते हैं, लेकिन अचानक मोबाइल चोरी होने और गुम हो जाने की वजह से उन लोगों को कितना दुख होता होगा, यह वो ही जान सकता है, जिसने अपनी पहली तनख्वाह या फिर उधार के पैसों से मोबाइल खरीदा हो.सिर्फ एक मोहर तक सीमित है सबकुछ।
रोजाना सैकड़ों मोबाइल चोरी या फिर गुम हो जाते हैं. सभी के सभी थानों को मिलाकर औसतन 15 से 20 मोबाइल चोरी या खोने की अप्लीकेशन अलग-अलग थानों पर पहुंचती हैं. अधिकतर मामलों में पुलिस गुमशुदगी लिखवाने की ही कोशिश करती है, जिसके बाद पीडित को एक अप्लीकेशन पर मोहर लगाकर दे दी जाती है और दूसरे को थाने में रख लिया जाता है.जीडी में नहीं होती हैं एंट्री
पीडि़त का सबसे पहला मकसद नया सिम निकलवाना होता है, जो गुमशुदगी की मोहर से पूरा हो जाता है. जिसके बाद वह चाहता है कि उसका नंबर सर्विलांस पर लग जाए, ताकि उसका फोन चालू हो तो उसे मिल जाए, लेकिन ऐसा नहीं होता है. अधिकतर मुंशी तो थाने में रखी गई अप्लीकेशन को जीडी में ही एंट्री नहीं करते हैं और एंट्री हो भी जाए तो फिर उसे सर्विलांस के लिए नहीं भेजा जाता है.इसलिए नहीं लगते सर्विलांस पर
पुलिस की सर्विलांस सेल में सिर्फ उन्हीं नंबरों को सर्विलांस पर लगाया जाता है जो किसी वारदात से जुड़े होते हैं. इसके अलावा यदि कोई पीडि़त एसपी ऑफिस में जाकर शिकायत करता है तो उसका नंबर सर्विलांस के लिए भेजा जाता है. इसके अलावा अन्य नंबरों को सर्विलांस पर नहीं लगाया जाता है. ऐसे में लोगों फोन बरामद होने की आस में सिर्फ सरकारी मुहर के भरोसे ही बैठे रहते हैं.

इन्होंने कहा—
जिले में सर्विसलांस के माहिर और थाना आदर्श मंडी के प्रभारी कर्मवीर सिंह बताते हैं कि पिछले दिनों जिले में पुलिस द्वारा भारी मात्रा में लोगों के खोए हुए मोबाइल बरामद किए गए हैं. उन्होंने बताया कि नंबरों को सर्विसलांस पर लगाने के बाद यदि मोबाइल फोन एक्टिव हो जाता है, तो पुलिस उसकी लोकेशन सर्च करती है. पुलिस द्वारा जनता के दर्द को ध्यान में रखते हुए सभी प्रयास किए जा रहे हैं.

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